शनि देव न्याय, कर्म और अनुशासन के अधिपति हैं। साढ़े साती या ढैया काल में मनुष्य को घबराने के बजाय अपने कर्मों में शुद्धि, अहंकार का त्याग, असहायों की सेवा, शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक और छाया दान करना चाहिए।
शनिवार प्रातः एक कांसे या लोहे की कटोरी में शुद्ध सरसों का तेल भरें। उसमें अपने मुख की छाया (प्रतिबिंब) देखें और शनि देव से जाने-अनजाने हुए अपराधों की क्षमा मांगें। तत्पश्चात यह तेल पात्र किसी जरूरतमंद या शनि मंदिर में दान करें। इसे छाया दान कहते हैं।
शौचालय और बाथरूम उत्तर-पश्चिम या पश्चिम में रखें, ईशान में नहीं।
दुकान का स्टॉक रूम या भारी सामान पश्चिम या नैऋत्य में रखें।
लाल किताब वास्तु में पूर्व को सूर्य, ईशान को गुरु, दक्षिण-पूर्व को शुक्र, उत्तर-पश्चिम को चंद्र, पश्चिम को शनि, नैऋत्य को राहु, उत्तर को केतु और दक्षिण को हनुमा…
एक पारंपरिक जांच में दूध को बर्तन में भरकर प्लॉट की मिट्टी में रखा जाता है। यदि उसके बाद बीमारी, झगड़ा या नुकसान जैसे संकेत आएं, तो इस मान्यता में प्लॉट ठीक नही…
यदि दूध जांच के बाद बार-बार बीमारी, झगड़ा या नुकसान दिखे, तो उस प्लॉट पर निर्माण न करें; बर्तन निकालकर पानी को प्रदूषित किए बिना सुरक्षित निपटान करें।
यदि घर के पास पीपल का पेड़ हो, तो उसकी उपेक्षा या हानि न करें; सम्मान और देखभाल करें।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
उपाय करते समय पूर्ण स्वच्छता, सात्विकता व दूसरों के प्रति सद्भाव रखें। किसी भी उपाय के प्रयोग का अंतिम उत्तरदायित्व पाठक एवं साधक के व्यक्तिगत विवेक पर होगा।