शनि देव न्याय, कर्म और अनुशासन के अधिपति हैं। साढ़े साती या ढैया काल में मनुष्य को घबराने के बजाय अपने कर्मों में शुद्धि, अहंकार का त्याग, असहायों की सेवा, शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक और छाया दान करना चाहिए।
शनिवार प्रातः एक कांसे या लोहे की कटोरी में शुद्ध सरसों का तेल भरें। उसमें अपने मुख की छाया (प्रतिबिंब) देखें और शनि देव से जाने-अनजाने हुए अपराधों की क्षमा मांगें। तत्पश्चात यह तेल पात्र किसी जरूरतमंद या शनि मंदिर में दान करें। इसे छाया दान कहते हैं।
अनावश्यक खर्चों और अचानक धन हानि पर रोक लगाता है तथा मंगल व शनि की ऊर्जा को संतुलित कर बचत में वृद्धि करता है।
घर के कोनों या बाथरूम में रखी नमक की कटोरी भारी तनाव व नकारात्मक तरंगों को सोखकर घर का वातावरण हल्का करती है।
घर और दुकान के मुख्य द्वार पर लटकाने से दरिद्रता व नजर दोष बाहर ही शांत हो जाते हैं और घर के अंदर केवल मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है।
शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कर्मजनित कष्टों को शांत करता है, दुर्घटना व असाध्य रोगों से रक्षा करता है।
गलत दिशा में बने शौचालय के गंभीर वास्तु दोष को बिना किसी तोड़फोड़ के समाप्त करता है और आर्थिक बर्बादी को रोकता है।
अपने भोजन का छोटा सुरक्षित हिस्सा पक्षियों और पशुओं को दें।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
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