शनि देव न्याय, कर्म और अनुशासन के अधिपति हैं। साढ़े साती या ढैया काल में मनुष्य को घबराने के बजाय अपने कर्मों में शुद्धि, अहंकार का त्याग, असहायों की सेवा, शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक और छाया दान करना चाहिए।
शनिवार प्रातः एक कांसे या लोहे की कटोरी में शुद्ध सरसों का तेल भरें। उसमें अपने मुख की छाया (प्रतिबिंब) देखें और शनि देव से जाने-अनजाने हुए अपराधों की क्षमा मांगें। तत्पश्चात यह तेल पात्र किसी जरूरतमंद या शनि मंदिर में दान करें। इसे छाया दान कहते हैं।
धैर्य, अनुशासन, आत्मसंयम, शोध और आध्यात्मिक एकाग्रता को सहारा देने के लिए।
अनुशासन, सहनशक्ति, स्थिरता, सुरक्षा और निरंतर प्रयास को सहारा देने के लिए।
उपाय आस्था और सकारात्मक सोच के साथ अधिक अर्थपूर्ण होते हैं; यह अभ्यास को जिम्मेदार और संतुलित रखता है।
मंत्र, दान, रत्न, व्रत, पूजा, रंग और छोटी दिनचर्या को ग्रह संतुलन में सहायक बताया गया है।
मान्यता है कि विनम्रता, दान और मेहनतकश लोगों की सेवा से शनि के कठोर प्रभाव शांत होते हैं।
मान्यता है कि शनि को मेहनत, ईमानदारी और निरंतरता सबसे अधिक प्रिय हैं।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
उपाय करते समय पूर्ण स्वच्छता, सात्विकता व दूसरों के प्रति सद्भाव रखें। किसी भी उपाय के प्रयोग का अंतिम उत्तरदायित्व पाठक एवं साधक के व्यक्तिगत विवेक पर होगा।