छाया ग्रह राहु-केतु एवं पूर्व कर्म आधारित पितृ दोष व कालसर्प दोष जीवन में अप्रत्याशित बाधाएं, मानसिक भ्रम व कार्यों में विलंब लाते हैं। शास्त्रों में इनके शमन हेतु बहते जल में नारियल प्रवाह, चांदी के नाग-नागिन का दान, श्वानों व पक्षियों को आहार और भगवान शिव का जलाभिषेक अत्यंत प्रभावी बतलाया गया है।
लाल किताब वास्तु में पूर्व को सूर्य, ईशान को गुरु, दक्षिण-पूर्व को शुक्र, उत्तर-पश्चिम को चंद्र, पश्चिम को शनि, नैऋत्य को राहु, उत्तर को केतु और दक्षिण को हनुमा…
लाल किताब में राहु से जुड़ा दैनिक समय शाम का समय माना गया है। इसे remedy engine में timing tag की तरह रखा जा सकता है।
बुध में गुरु-राहु का मेल माना गया है और इसे नाम, पहचान और दुनिया में छवि से जोड़ा गया है।
केतु जैसा शनि गंभीर कष्ट से जोड़ा गया है, इसलिए ऐसा नियम सावधानी से लगाना चाहिए।
उच्च राहु को मंगल-शनि से जोड़ा गया है और इससे झगड़ा/संघर्ष जैसे विषय जुड़ सकते हैं।
जब राहु अशुभ माना जाए तो स्रोत में संकेत बताए गए हैं जैसे काले कुत्ते को कष्ट, नाखून काले, बुद्धि भ्रम और शत्रु बढ़ना। सुझाया उपाय: परिवार में मेल रखें, ससुराल …
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
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