छाया ग्रह राहु-केतु एवं पूर्व कर्म आधारित पितृ दोष व कालसर्प दोष जीवन में अप्रत्याशित बाधाएं, मानसिक भ्रम व कार्यों में विलंब लाते हैं। शास्त्रों में इनके शमन हेतु बहते जल में नारियल प्रवाह, चांदी के नाग-नागिन का दान, श्वानों व पक्षियों को आहार और भगवान शिव का जलाभिषेक अत्यंत प्रभावी बतलाया गया है।
यदि बुखार, मानसिक रोग, महामारी-जैसा भय, दुर्घटना, अचानक चोट बार-बार दिखें तो कुंडली में Rahu जाँचकर उसी का लाल किताब उपाय चुनें, अनुमान से नहीं।
जब यह योग दमा या सांस कष्ट से जुड़ा हो तो केवल लक्षण नहीं, दूसरे ग्रह को खराब करने वाले ग्रह का उपाय करें।
जब यह योग जन्मकुंडली में सामान्यतः साथ नहीं; वर्षफल में विशेष तर्क से जुड़ा हो तो केवल लक्षण नहीं, दूसरे ग्रह को खराब करने वाले ग्रह का उपाय करें।
जब यह योग बवासीर की प्रवृत्ति से जुड़ा हो तो केवल लक्षण नहीं, दूसरे ग्रह को खराब करने वाले ग्रह का उपाय करें।
जब यह योग शरीर फटना/घाव या रक्त रोग संकेत से जुड़ा हो तो केवल लक्षण नहीं, दूसरे ग्रह को खराब करने वाले ग्रह का उपाय करें।
यह योग लकवा या मानसिक रोग का भय से जुड़ा है। पारंपरिक उपाय और कुंडली पुष्टि के बाद संबंधित ग्रह का उपाय करें।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
उपाय करते समय पूर्ण स्वच्छता, सात्विकता व दूसरों के प्रति सद्भाव रखें। किसी भी उपाय के प्रयोग का अंतिम उत्तरदायित्व पाठक एवं साधक के व्यक्तिगत विवेक पर होगा।