छाया ग्रह राहु-केतु एवं पूर्व कर्म आधारित पितृ दोष व कालसर्प दोष जीवन में अप्रत्याशित बाधाएं, मानसिक भ्रम व कार्यों में विलंब लाते हैं। शास्त्रों में इनके शमन हेतु बहते जल में नारियल प्रवाह, चांदी के नाग-नागिन का दान, श्वानों व पक्षियों को आहार और भगवान शिव का जलाभिषेक अत्यंत प्रभावी बतलाया गया है।
केतु से कुत्ता, पुत्र, भांजा, यात्रा, कान, पैर, रीढ़, तिल, खटाई, केला, काला-सफेद कंबल, प्याज और लहसुन जोड़े गए हैं। इन्हें कुंडली पुष्टि के बाद ही लें।
कुत्तों या केतु-प्रतीकों को नुकसान न पहुँचाएँ; स्रोत कुछ स्थितियों में इसे संतान/वंश पर असर से जोड़ता है।
केतु कमजोर हो तो गुरु को बुजुर्ग सम्मान, पीला दान, कुलगुरु/परिवार मार्गदर्शक आशीर्वाद या सोना/केसर प्रतीक से सहारा दें।
पहले केतु में स्रोत अनुसार शाम को लड़के और सुबह लड़की को अपने हाथ से मिठाई देने से बचें।
मंदिर या धर्मस्थान में नारियल चढ़ाएँ।
लोहे की ठोस गोली को लाल रंग कर सुरक्षित अपने पास रखें।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
उपाय करते समय पूर्ण स्वच्छता, सात्विकता व दूसरों के प्रति सद्भाव रखें। किसी भी उपाय के प्रयोग का अंतिम उत्तरदायित्व पाठक एवं साधक के व्यक्तिगत विवेक पर होगा।