छाया ग्रह राहु-केतु एवं पूर्व कर्म आधारित पितृ दोष व कालसर्प दोष जीवन में अप्रत्याशित बाधाएं, मानसिक भ्रम व कार्यों में विलंब लाते हैं। शास्त्रों में इनके शमन हेतु बहते जल में नारियल प्रवाह, चांदी के नाग-नागिन का दान, श्वानों व पक्षियों को आहार और भगवान शिव का जलाभिषेक अत्यंत प्रभावी बतलाया गया है।
परंपरा में चना या मसूर बहते पानी में देने का जिक्र है; यहां इसे सुरक्षित दान या प्रतीक अर्पण रखा गया है।
कुत्तों को भोजन देना संतान, सेहत और यात्रा चिंता पर केतु के असर को नरम करने का उपाय है।
पुराने उपाय में अंगूठा दूध में डुबोकर चूसने का जिक्र है; यहां इसे स्वच्छता और प्रतीकात्मक सावधानी के साथ रखा गया है।
लाल किताब वास्तु में पूर्व को सूर्य, ईशान को गुरु, दक्षिण-पूर्व को शुक्र, उत्तर-पश्चिम को चंद्र, पश्चिम को शनि, नैऋत्य को राहु, उत्तर को केतु और दक्षिण को हनुमा…
लाल किताब में केतु से जुड़ा दैनिक समय सूर्योदय से दो घंटे पहले से सूर्योदय तक माना गया है। इसे remedy engine में timing tag की तरह रखा जा सकता है।
केतु जैसा शनि गंभीर कष्ट से जोड़ा गया है, इसलिए ऐसा नियम सावधानी से लगाना चाहिए।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
उपाय करते समय पूर्ण स्वच्छता, सात्विकता व दूसरों के प्रति सद्भाव रखें। किसी भी उपाय के प्रयोग का अंतिम उत्तरदायित्व पाठक एवं साधक के व्यक्तिगत विवेक पर होगा।