छाया ग्रह राहु-केतु एवं पूर्व कर्म आधारित पितृ दोष व कालसर्प दोष जीवन में अप्रत्याशित बाधाएं, मानसिक भ्रम व कार्यों में विलंब लाते हैं। शास्त्रों में इनके शमन हेतु बहते जल में नारियल प्रवाह, चांदी के नाग-नागिन का दान, श्वानों व पक्षियों को आहार और भगवान शिव का जलाभिषेक अत्यंत प्रभावी बतलाया गया है।
जन्मकुंडली का 11वें भाव का ग्रह वर्षफल लग्न में आए तो शुभ और अष्टम में आए तो कष्टकारी कहा गया है; ऐसी स्थिति में 11वें ग्रह या उसके मित्र ग्रह की वस्तु सहायक है…
यदि जन्मकुंडली में बृहस्पति और केतु शुभ हों, तो वर्षफल में 11वें चंद्रमा से शुभ फल मिलता है, विशेषकर माता-पिता के रहते; माता-पिता की सेवा और सम्मान करें.
यदि बृहस्पति अशुभ हो तो बेटी के विवाह में दो स्वर्ण टुकड़ों में से एक दान/जल-अर्पण और एक बेटी को रखने के लिए देना बताया गया है. चंद्र, शुक्र, मंगल, शनि, राहु और…
यदि बृहस्पति षष्ठ भाव में हो और केतु अशुभ भाव में हो, तो केतु उपाय बताए गए हैं.
परिवार शांति और मान की रक्षा के लिए साफ संबंध आचरण केतु उपाय माना गया है।
कन्याओं का आशीर्वाद लेना विनम्रता और परिवार शांति का उपाय माना गया है।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
उपाय करते समय पूर्ण स्वच्छता, सात्विकता व दूसरों के प्रति सद्भाव रखें। किसी भी उपाय के प्रयोग का अंतिम उत्तरदायित्व पाठक एवं साधक के व्यक्तिगत विवेक पर होगा।