शास्त्रों में कहा गया है "चंद्रमा मनसो जातः" — चंद्रमा मन, भाव और मानसिक शांति के स्वामी हैं। शुक्ल पक्ष में सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि, पूर्णिमा को मानसिक शक्ति, कृष्ण पक्ष में बाधाओं का त्याग और अमावस्या को घर की शुद्धि करने से मानसिक क्लेश व अनिद्रा शांत होते हैं।
पूर्णिमा की रात्रि को एक कांच के पात्र या चांदी के गिलास में पीने का जल भरकर 3-4 घंटे चांदनी में रखें। चंद्रमा की शीतल रश्मियों से अभिमंत्रित इस जल को ग्रहण करने से मन शांत रहता है, अनिद्रा दूर होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
चंद्र को राशिफल-स्वभाव वाला माना गया है, इसलिए इसके उपाय में राशि, भाव और सहायक ग्रह देखें।
बुध की गड़बड़ी में पहले सूर्य/गुरु/मंगल, फिर चंद्र/शुक्र और अंत में खास ग्रहों से सहायता देखें।
चंद्र सोमवार और चांदनी रात से जुड़ा है। इसे केवल तब समय फ़िल्टर मानें जब चंद्र उपाय पहले से पुष्टि हो।
जहाँ गाय सेवा बताई हो, चारा खिलाएँ या सही गौशाला की मदद करें; जबरन गाय पालना जरूरी नहीं।
मानसिक संकेत केवल एक ग्रह से नहीं पढ़े जाते; गुरु से विवेक, चंद्र से भावना और बुध से बुद्धि/नाड़ी जोड़ें।
चंद्र-प्रकार व्यक्ति शांति, सफेद/ठंडी झलक, ग्रहणशील व्यवहार और भावनात्मक प्रतिक्रिया से पहचाना जाता है।
इस मंच पर प्रस्तुत सभी उपाय, मंत्र, टोटके, रत्न एवं वास्तु सुझाव प्राचीन वैदिक, लाल किताब, शाबर एवं पारंपरिक लोक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित हैं। इन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन, श्रद्धा एवं आत्म-सुधार हेतु प्रदान किया गया है।
यह उपाय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय (Medical), कानूनी (Legal), मनोवैज्ञानिक या वित्तीय (Financial) सलाह का विकल्प नहीं हैं। शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता, कानूनी विवाद अथवा वित्तीय संकट में सदैव लाइसेंस प्राप्त योग्य पेशेवर से परामर्श लें।
हम किसी चमत्कार, तांत्रिक अनुष्ठान, या परिणाम की 100% गारंटी का दावा नहीं करते। उपाय का प्रभाव व्यक्तिगत कर्म, निष्ठा, सात्विक भाव एवं ईश्वरीय इच्छा पर निर्भर करता है।
उपाय करते समय पूर्ण स्वच्छता, सात्विकता व दूसरों के प्रति सद्भाव रखें। किसी भी उपाय के प्रयोग का अंतिम उत्तरदायित्व पाठक एवं साधक के व्यक्तिगत विवेक पर होगा।