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यातायात व परिवहन मनोविज्ञान: ड्राइवर व्यवहार, रिस्क होमियोस्टैसिस और विजन जीरो

सड़क सुरक्षा और चालक मनोविज्ञान का विज्ञान, गेराल्ड वाइल्ड का सिद्धांत, जेम्स रीजन का DBQ मॉडल और विजन जीरो सुरक्षा पर 14 पाठ।

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लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

यातायात और परिवहन मनोविज्ञान (Traffic and Transport Psychology) इस बात का वैज्ञानिक अध्ययन है कि सड़क पर वाहन चलाते समय इंसान का दिमाग कैसे काम करता है, सड़क हादसे किन मानवीय गलतियों से होते हैं और परिवहन प्रणाली को कैसे सुरक्षित बनाया जाए। हर साल लाखों लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जाती है, जिन्हें केवल 'दुर्भाग्य' कहकर टाला नहीं जा सकता। गेराल्ड वाइल्ड (Gerald Wilde) के रिस्क होमियोस्टैसिस सिद्धांत, जेम्स रीजन के ड्राइवर व्यवहार वर्गीकरण (DBQ) और वैश्विक विजन जीरो (Vision Zero) मॉडल पर आधारित यह विषय सड़क सुरक्षा को वैज्ञानिक बनाता है। इसमें मोबाइल फोन से होने वाला ध्यान भटकाव (Distracted Driving), रोड रेज (गुस्सा और आक्रामकता), थकान व झपकी आना और पैदल चलने वालों की सुरक्षा शामिल है। यातायात और परिवहन मनोविज्ञान मनोशिक्षा मॉड्यूल 14 वीडियो पाठों में चालक के ध्यान, सड़क डिजाइन, गति नियंत्रण और सुरक्षित यातायात व्यवहार के वैज्ञानिक नियम सिखाता है।

जेम्स रीजन का ड्राइवर व्यवहार मॉडल: गलतियां बनाम जानबूझकर उल्लंघन

सड़क पर होने वाली चूकें तीन तरह की होती हैं: अनजानी गलतियां (Errors) जैसे गति या दूरी का गलत अंदाजा लगाना; लापरवाही (Lapses) जैसे ध्यान भटकना या गलत बटन दबना; और उल्लंघन (Violations) जैसे जानबूझकर लाल बत्ती तोड़ना या अत्यधिक तेज गाड़ी चलाना।

विजन जीरो (Vision Zero): इंसान की जान अमूल्य है

इस आधुनिक सिद्धांत के अनुसार इंसान गलतियों का पुतला है और उससे चूक होना स्वाभाविक है। इसलिए सड़कों और गाड़ियों का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि अगर किसी चालक से गलती हो भी जाए, तो उस टक्कर की गति इतनी धीमी हो कि किसी की जान न जाए।

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