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टिक विकार और टॉरेट सिंड्रोम: प्रीमोनेटरी अर्ज, सीबीआईटी (CBIT) और हैबिट रिवर्सल

टॉरेट सिंड्रोम के न्यूरोबायोलॉजिकल कारण, आंतरिक बेचैनी (premonitory urge) और सीबीआईटी व्यवहार थेरेपी पर 21 संरचित पाठ।

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लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

टिक विकार (Tic Disorders) और टॉरेट सिंड्रोम (Tourette Syndrome) मस्तिष्क के बेसल गैंग्लिया से जुड़े न्यूरोडेवलपमेंटल विकार हैं, जिनमें अचानक, बार-बार और अनैच्छिक शारीरिक गतियां (Motor tics: जैसे आंखें मटकाना, कंधे उचकाना) या आवाजें (Vocal tics: जैसे गला साफ करना, खंखारना) निकलती हैं। फिल्मों में दिखाए जाने वाले गाली-गलौज वाले शब्दों (कॉप्रोलैलिया) के लक्षण केवल 10-15% मरीजों में ही होते हैं। डॉ. जॉन पियासेंटिनी और डगलस वुड्स की कॉम्प्रिहेंसिव बिहेवियरल इंटरवेंशन फॉर टिक्स (CBIT) पर आधारित टिक विकार और टॉरेट सिंड्रोम मनोशिक्षा मॉड्यूल 21 पाठों में आंतरिक बेचैनी (Premonitory Urge), हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग और टिक्स को शांत करने के वैज्ञानिक उपायों का विवरण देता है।

प्रीमोनेटरी अर्ज (Premonitory Urge): आंतरिक खुजली जैसी भावना

टिक पूरी तरह अनियंत्रित नहीं होते; टिक आने से ठीक पहले व्यक्ति को शरीर में एक असहज खिंचाव या आंतरिक बेचैनी महसूस होती है (जैसे छींक आने से पहले नाक में सुरसुराहट)। टिक करने पर वह बेचैनी कुछ पलों के लिए शांत हो जाती है।

सीबीआईटी (CBIT) और हैबिट रिवर्सल

सीबीआईटी थेरेपी में व्यक्ति को टिक आने से ठीक पहले के अहसास को पहचानना और उसके तुरंत बाद एक विरोधी क्रिया (जैसे 1 मिनट तक मुंह बंद करके नाक से धीमी सांस लेना या मांसपेशियों को कसना) करना सिखाया जाता है, जिससे टिक करने की आवश्यकता धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।

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टॉरेट सिंड्रोम के न्यूरोबायोलॉजिकल कारण, आंतरिक बेचैनी (premonitory urge) और सीबीआईटी व्यवहार थेरेपी पर 21 संरचित पाठ।

टिक विकार और टॉरेट सिंड्रोम: प्रीमोनेटरी अर्ज, सीबीआईटी (CBIT) और हैबिट रिवर्सल

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