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Vedic Psychology

शीतली व सीत्कारी प्राणायाम: अवचेतन मन व संस्कार शुद्धि

शीतली व सीत्कारी प्राणायाम से अंतर्मन के पुराने नकारात्मक संस्कारों को मिटाने और सकारात्मक सोच विकसित करने के उपाय। क्रियास्य।

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लेखक: Kriyasya Companion 3 मिनट का पाठ अपडेट: October 29, 2026

संक्षिप्त मुख्य बिंदु (शीतली व सीत्कारी प्राणायाम): जीभ को मोड़कर या दांतों के बीच से ठंडी हवा अंदर खींचकर शरीर की अतिरिक्त गर्मी, जलन, एसिडिटी और क्रोध को तुरंत शांत करने की पद्धति। वैदिक मनोविज्ञान और योग शास्त्र के अनुसार, मन को शांत और एकाग्र करने के लिए चंद्रमा, शुक्र व सोम तत्व (शीतल अमृत, जल तत्व और मानसिक शांति) को संतुलित करें, तरबूज, खीरा, ककड़ी और ताजा नारियल पानी पीना, और सफेद या हल्के वस्त्र पहनना का पालन करें और 15 बार शीतली प्राणायाम करना और उसके बाद थोड़ा सा पुदीने का पानी पीना जैसे सरल व प्रामाणिक उपाय अपनाएं।

संस्कारों की शुद्धि: अवचेतन मन की नकारात्मकता को मिटाकर नई सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण

प्रामाणिक वैदिक मनोविज्ञान (मनोविज्ञान शास्त्र) में शीतली और सीत्कारी प्राणायाम: पित्त दोष, मानसिक गर्मी, एसिडिटी और घबराहट की शांति का गहरा संबंध चंद्रमा, शुक्र व सोम तत्व (शीतल अमृत, जल तत्व और मानसिक शांति) से माना गया है। मन कोई दुश्मन नहीं है; यह एक संवेदनशील साधन है जिसे सही अभ्यास और शांत सांसों से आसानी से साधा जा सकता है।

पहलूसंतुलित व शांत स्थितिअशांत व तनावग्रस्त स्थितिशास्त्रीय उपाय
गुण व मन का स्वभावगर्मियों में या दोपहर के समय किसी ठंडी व हवादार जगह पर बैठकर शांत मन से अभ्यास करनासर्दियों की ठंडी हवा में या तेज खांसी-जुकाम होने पर जबरदस्ती ठंडा प्राणायाम करनाठंडी सांस मुंह से अंदर लेने के बाद, दोनों नथुनों से धीरे-धीरे गर्म सांस बाहर छोड़ना
शारीरिक व नसों की स्थितिगहरी व शांत सांसें, नसों का तनाव दूर, चेहरे पर शांतितेज सांस, दिल की धड़कन बढ़ना, मांसपेशियों में खिंचाव10 मिनट नाड़ी शोधन प्राणायाम
सोच व भावनाएंएकाग्रता, संतोष, सकारात्मक विचार और धैर्यअत्यधिक सोच, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और निराशासाक्षी भाव और शांत बैठकर ध्यान
दैनिक आदतेंसात्विक भोजन, समय पर सोना, सुबह की ताजी धूपदेर रात भारी खाना, मोबाइल में उलझे रहना15 बार शीतली प्राणायाम करना और उसके बाद थोड़ा सा पुदीने का पानी पीना

प्रामाणिक शास्त्रों का वचन (Hatha Yoga Pradipika & Gheranda Samhita)

वैदिक मनोविज्ञान के सबसे प्रामाणिक ग्रंथ Hatha Yoga Pradipika & Gheranda Samhita में मन को वश में करने का अनमोल सूत्र मिलता है:

"जिह्वया वायुमाकृष्य पूर्ववत् कुम्भकं चरेत्। शनकैर्घ्राणरन्ध्राभ्यां रेचयेत् पवनं सुधीः॥"

— Hatha Yoga Pradipika & Gheranda Samhita

सरल हिंदी अर्थ: Draw in air through the curled tongue, retain breath gently as before, and let the wise practitioner exhale slowly through both nostrils.

जब गुस्से या बेचैनी की आग आपके मन को जलाने लगे, तो शीतली सांस से उसे तुरंत शांत करें। आपके अंदर ठंडक पैदा करने की प्राकृतिक शक्ति है।

चित्त को शांत रखने के 5 आसान दैनिक नियम

  1. सुबह का मौन समय: सुबह आंख खुलते ही फोन न छुएं; 3 मिनट शांत बैठकर अपनी सांसों को आते-जाते महसूस करें।
  2. नाड़ी शोधन प्राणायाम: रोज 10 मिनट शांत बैठकर अनुलोम-विलोम करें जिससे दिमाग की नसों को तुरंत आराम मिले।
  3. अच्छा मानसिक आहार: जैसे भोजन से शरीर बनता है, वैसे ही विचारों से मन बनता है; नकारात्मक खबरों और विवादों से दूर रहें।
  4. साक्षी भाव का अभ्यास: दिन में दो बार 1 मिनट के लिए ठहरें और अपने विचारों को बिना किसी फैसले के दूर से देखें।
  5. रात की शुद्धि: सोने से पहले हाथ-पैर धोएं, दिन भर की चिंताओं को भगवान को सौंपें और शांत मन से सोएं।

बिना खर्च के सिद्ध और सरल मानसिक उपाय

मुख्य उपाय: 15 बार शीतली या सीत्कारी करें; नाक से सांस छोड़ें; नारियल पानी पिएं; और मन व पेट की जलन को शांत करें।

महर्षि पतंजलि कहते हैं कि जब मन के व्यर्थ विचार शांत हो जाते हैं, तब इंसान अपनी सच्ची आत्मिक शांति और आनंद में स्थित हो जाता है। मन की शांति कहीं बाहर नहीं, आपके भीतर ही मौजूद है।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

अगर किसी की जीभ नली की तरह न मुड़े तो वह क्या करे?

वे सीत्कारी प्राणायाम करें: दांतों को आपस में सटाकर 'सी-सी' की आवाज के साथ मुंह से ठंडी सांस अंदर लें।

शरीर और पेट को ठंडा करने में कितने मिनट लगते हैं?

केवल 8 से 10 बार यह प्राणायाम करने से पेट की जलन, पसीना और गुस्सा तुरंत शांत हो जाता है।

क्या यह एसिडिटी और खट्टी डकारों के लिए फायदेमंद है?

हां; आयुर्वेद के अनुसार भोजन से पहले 10 बार शीतली करने से पित्त शांत होता है और एसिडिटी से राहत मिलती है।

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शीतली व सीत्कारी प्राणायाम से अंतर्मन के पुराने नकारात्मक संस्कारों को मिटाने और सकारात्मक सोच विकसित करने के उपाय। क्रियास्य।

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