सनातन धर्म का शास्त्र साहित्य (वेद, उपनिषद, पुराण और इतिहास) विश्व का सबसे प्राचीन, विशाल और गहन ज्ञानकोश है। इसे मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है: श्रुति (जो ऋषियों द्वारा समाधि में प्रत्यक्ष सुना गया—वेद और उपनिषद) और स्मृति (जो समय के साथ समाज के मार्गदर्शन हेतु लिखा गया—पुराण, इतिहास और धर्मशास्त्र)। चारों वेद (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद) सृष्टि के मूल नाद और विज्ञान के स्रोत हैं, जबकि उपनिषद जीव और ब्रह्म की एकता (अद्वैत) का साक्षात्कार कराते हैं। सनातन शास्त्र महा-पुस्तकालय पर मूल संस्कृत श्लोक, हिंदी अन्वय, ऋचाओं का शुद्ध उच्चारण और महान आचार्यों के प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध हैं।
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सनातन शास्त्र परंपरा का पावन वर्गीकरण
| शास्त्र श्रेणी | प्रमुख पावन ग्रंथ | मूल दार्शनिक विषय व अधिकार |
|---|---|---|
| श्रुति (अपौरुषेय वेद) | 4 वेद (संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद) | सनातन धर्म का सर्वोच्च और अपरिवर्तनीय प्रमाण; सृष्टि के मूल नाद और दिव्य ज्ञान का भंडार। |
| उपनिषद (वेदांत) | ईश, केन, कठ, मुण्डक, माण्डूक्य, छान्दोग्य, आदि | आत्मज्ञान की सर्वोच्च मीमांसा; आत्मा और परमात्मा का अद्वैत संबंध (तत्त्वमसि)। |
| इतिहास (जीवन दर्शन) | वाल्मीकि रामायण व महाभारत (श्रीमद्भगवद्गीता सहित) | गृहस्थ, राजनीति और युद्ध में धर्म के व्यावहारिक पालन का ऐतिहासिक व जीवंत उदाहरण। |
| पुराण (ब्रह्मांडीय आख्यान) | 18 महापुराण (श्रीमद्भागवत, विष्णु, शिव, स्कंद, आदि) | कथाओं और रूपकों के माध्यम से जनसामान्य को भक्ति, सदाचार और धर्म का सरल बोध कराना। |
शास्त्र अध्ययन के 3 शास्त्रीय सोपान (स्वाध्याय विधि)
- श्रवण: प्रामाणिक गुरु या विद्वान के मुख से अथवा शुद्ध पाठ सुनकर श्लोकों का सही उच्चारण और अर्थ ग्रहण करना।
- मनन: पढ़े गए ज्ञान पर अपने विवेक और तर्क से गहन विचार करना और संशयों का निवारण करना।
- निदिध्यासन: शास्त्र के सत्य को केवल बौद्धिक स्तर पर न रखकर ध्यान और दैनिक आचरण में आत्मसात करना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रुति और स्मृति में क्या मूलभूत अंतर है?
श्रुति (वेद) शाश्वत और सार्वकालिक सत्य हैं जिनका कभी खंडन नहीं हो सकता। स्मृति (पुराण, धर्मशास्त्र) सामाजिक और देश-काल के अनुसार ऋषियों द्वारा रचित मार्गदर्शिकाएं हैं।
वेदों को 'अपौरुषेय' क्यों कहा जाता है?
'अपौरुषेय' का अर्थ है जिसे किसी मनुष्य ने नहीं बनाया। वैदिक ऋचाएं ब्रह्मांड में सदा से विद्यमान दिव्य ध्वनियां हैं, जिन्हें ऋषियों ने गहन ध्यान में केवल सुना और संकलित किया।