रेंटल यील्ड कैलकुलेटर: सकल यील्ड, शुद्ध कैप रेट और रियल एस्टेट कैशफ्लो विश्लेषण
रियल एस्टेट में निवेश करते समय अक्सर लोग केवल यह देखते हैं कि मकान से कितना किराया आ रहा है। ब्रोशर पर दिखने वाली '4% रेंटल यील्ड' हकीकत में 2.5% से भी कम रह जाती है, जब उसमें से मेंटेनेंस शुल्क, प्रॉपर्टी टैक्स, मकान खाली रहने का नुकसान और नियमित मरम्मत के खर्च घटाए जाते हैं। क्रियास्य रेंटल यील्ड कैलकुलेटर आपको सकल रेंटल यील्ड (Gross Yield), शुद्ध रेंटल यील्ड (Net Cap Rate) और कैश-ऑन-कैश रिटर्न का सटीक वित्तीय गणित प्रदान करता है ताकि आप एक सूचित और लाभदायक निवेश निर्णय ले सकें।
रेंटल यील्ड की गणना के सूत्र
- सकल रेंटल यील्ड (Gross Yield): [ (मासिक किराया × 12) / कुल संपत्ति लागत ] × 100। यह केवल ऊपर-ऊपर का किराया अनुपात दर्शाता है।
- शुद्ध रेंटल यील्ड (Net Cap Rate): शुद्ध वार्षिक किराया आय (रखरखाव, टैक्स और खाली रहने का खर्च घटाकर) को कुल निवेश से भाग देकर निकाला जाता है। यही निवेशक की असली कमाई होती है।
- कैश-ऑन-कैश रिटर्न: यदि आपने लोन पर घर लिया है, तो ईएमआई चुकाने के बाद आपके हाथ में बची नकद राशि का आपके द्वारा लगाए गए डाउन पेमेंट से अनुपात।
भारत में औसत रेंटल यील्ड बेंचमार्क
- मेट्रो रिहायशी फ्लैट्स (मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु): 2.5% से 3.5% (सकल)।
- कमर्शियल ऑफिस और दुकानें: 6.0% से 8.5% (सकल)।
- स्टूडेंट हाउसिंग व पीजी: 4.5% से 6.5% (सकल)।
सामान्य प्रश्न
कम रेंटल यील्ड होने के बावजूद लोग रिहायशी मकानों में निवेश क्यों करते हैं?
क्योंकि रिहायशी संपत्तियों में भविष्य में पूंजीगत मूल्य वृद्धि (Capital Appreciation) की संभावना होती है। कम किराए की भरपाई समय के साथ मकान की कीमत बढ़ने से पूरी होती है।
