अपना घर बनाना अथवा भूमि व अचल संपत्ति में निवेश करना जीवन के सबसे बड़े संकल्पों में से एक है। वैदिक ज्योतिष में भूमि, भवन और वाहन सुख का विचार चतुर्थ भाव (गृह स्थान), भूमि कारक मंगल, वाहन व ऐश्वर्य कारक शुक्र और चतुर्थांश (D4 कुंडली) से किया जाता है। क्रियास्य संपत्ति एवं भूमि रिपोर्ट आपकी कुंडली में अचल संपत्ति के योगों, पैतृक संपत्ति की प्राप्ति और रजिस्ट्री हेतु शुभ समय का विश्लेषण करती है।
संपत्ति योग के प्रमुख शास्त्रीय सूत्र
चतुर्थ भाव का स्वामी यदि शुभ भावों में स्थित हो अथवा मंगल बलवान होकर केंद्र-त्रिकोण में बैठा हो, तो जातक विशाल भू-संपत्ति का स्वामी बनता है। चतुर्थांश (D4) कुंडली संपत्ति के वास्तविक उपभोग और स्थायित्व की पुष्टि करती है।
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