योग दर्शन का सर्वोच्च और निर्विवाद आधार ग्रंथ महर्षि पतंजलि कृत योग सूत्र है। इसमें चार पादों में कुल 196 सूत्र संकलित हैं: समाधि पाद, साधन पाद, विभूति पाद और कैवल्य पाद। सूत्र 1.2 में योग की विश्व-प्रसिद्ध परिभाषा दी गई है: *'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'* — चित्त की वृत्तियों (मानसिक चंचलता और विचारों के भंवर) का निरोध ही योग है। पतंजलि ने मनुष्य के दुखों के मूल कारण पांच क्लेशों (अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश) का विश्लेषण किया है और उनसे मुक्ति का उपाय अभ्यास और वैराग्य बताया है। क्रियास्य योग सूत्र स्वाध्याय टूल इन 196 सूत्रों का शब्दार्थ, सरल हिंदी अर्थ और प्रामाणिक भाष्य प्रस्तुत करता है।
योग सूत्रों के चार पाद
- समाधि पाद: चित्त की वृत्तियां, एकाग्रता के उपाय, अभ्यास और वैराग्य का स्वरूप।
- साधन पाद: क्रिया योग, पांच क्लेश और अष्टांग योग के प्रारंभिक अंग।
- विभूति पाद: संयम (धारणा, ध्यान, समाधि) और मानसिक सिद्धियों का वैज्ञानिक रहस्य।
- कैवल्य पाद: कर्म संस्कार, चित्त की मुक्ति और परम मोक्ष (कैवल्य)।
पतंजलि योग सूत्रों का स्वाध्याय करें
क्रियास्य योग सूत्र टूल द्वारा प्रत्येक सूत्र का शुद्ध संस्कृत उच्चारण और व्यावहारिक जीवन में उसका उपयोग समझें।
योग सूत्र खोलें→