Skip to main content
अध्यात्म

नवरत्न अंगूठी पेंडेंट: किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं

अपनी कुंडली और लग्न के अनुसार जानिए कि नवरत्न अंगूठी पेंडेंट किसे पहनना चाहिए और किन लोगों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है।

हिन्दी संस्करण Read in English →
लेखक: Kriyasya Companion 4 मिनट का पाठ अपडेट: October 30, 2026

वैदिक ज्योतिष में रत्न, रुद्राक्ष, धातु और सिद्ध यंत्र केवल आभूषण नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्मांडीय ऊर्जा और ग्रहों की किरणों को सोखने वाले अत्यंत शक्तिशाली माध्यम हैं। नवरत्न अंगूठी व पेंडेंट: नवग्रहों के 9 रत्नों का दिव्य संगम, संतुलन और सर्वांगीण सुरक्षा को सही धातु, सही उंगली और विधि-विधान से धारण करने पर यह हमारे जीवन से ग्रह दोषों को दूर करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और सुख-समृद्धि के नए रास्ते खोलता है।

नवरत्न अंगूठी पेंडेंट का मूल ज्योतिषीय रहस्य

मुख्य ज्योतिषीय नियम: नवरत्न अंगूठी व पेंडेंट: नवग्रहों के 9 रत्नों का दिव्य संगम, संतुलन और सर्वांगीण सुरक्षा का मूल प्रभाव सूर्य को केंद्र में रखकर नवग्रहों के नौ रत्नों का पवित्र चक्र, जो सभी नौ ग्रहों के दोषों को शांत कर जीवन में सुरक्षा व संतुलन लाता है से संबंधित है। जब इसे सही मुहूर्त में गंगाजल व कच्चे दूध से शुद्ध करके उचित उंगली में पहना जाता है, तो यह ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा को सीधे हमारे शरीर की नाड़ियों तक पहुंचाता है।

हमारे प्राचीन ग्रंथ Navagraha Stotra & Brihat Samhita के अनुसार रत्न किस्मत को रातोंरात नहीं बदलते, बल्कि हमारे भाग्य के रास्ते में आने वाली रुकावटों को हटाकर हमारी मेहनत को सफल बनाते हैं। इसे नियमपूर्वक धारण करने से मन में स्थिरता आती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

प्रामाणिक संस्कृत श्लोक व सरल हिंदी भावार्थ

ब्रह्मामुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥

Navagraha Stotra & Brihat Samhita

सरल भावार्थ: May Brahma, Vishnu, Shiva, along with the Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn, Rahu, and Ketu make every dawn auspicious for me.

यह पावन श्लोक इस बात का प्रमाण है कि शास्त्रों में रत्नों और पवित्र रुद्राक्षों की महिमा कितनी स्पष्ट बताई गई है। नियमों का पालन करके पहनने से ही इसका पूरा शुभ फल मिलता है।

रत्न, धातु, उंगली व ज्योतिषीय नियम तालिका

पहलु शास्त्र सम्मत नियम शारीरिक व मानसिक असर
स्वामी ग्रह व तत्व समस्त नवग्रह / सृष्टि तत्व और संपूर्ण ग्रह संतुलन शरीर की ऊर्जा को संतुलित और शांत करता है
सही धातु व उंगली शुद्ध सोना या अष्टधातु; सीधे हाथ की अनामिका उंगली या गले में पेंडेंट रत्न की ऊर्जा नसों के माध्यम से सही दिशा में बहती है
शुभ दिन व मुहूर्त शुक्ल पक्ष का रविवार या गुरुवार, रवि पुष्य या गुरु पुष्य नक्षत्र में; पूर्व दिशा ग्रह के अनुकूल समय में धारण करने से लाभ जल्दी मिलता है
प्राकृतिक रंग व रूप नवग्रहों का बहुरंगी दिव्य प्रकाश: लाल, श्वेत, सिंदूरी, हरा, पीला, चमकीला, नीला, शहद और अंबर रंग सूर्य की किरणों को सही तरीके से सोखकर शरीर तक पहुंचाता है
पूजा व सामग्री नवधान्य (नौ अनाज), गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, शुद्ध केसर और घी का दीपक रत्न की नकारात्मकता दूर होकर प्राण ऊर्जा जाग्रत होती है
इन दोषों से बचें रत्नों की गलत दिशा, कांच या प्लास्टिक के नकली नग या टूटे-फूटे रत्न टूटे या अशुद्ध रत्न के बुरे असर से बचाव होता है
विशेष निषेध रत्नों के पारंपरिक क्रम से कभी छेड़छाड़ न करें; सूर्य (माणिक्य) हमेशा केंद्र में ही होना चाहिए परस्पर विरोधी रत्नों के दुष्प्रभाव से रक्षा रहती है

शुद्धिकरण व धारण करने की 5 आसान चरणबद्ध विधियां

  1. रत्न का शुद्धिकरण: पहनने से पहले रत्न या रुद्राक्ष को तांबे या चांदी की कटोरी में कच्चे दूध, गंगाजल, तुलसी दल और शहद के मिश्रण में 15 मिनट रखें।
  2. साफ जल से स्नान: इसके बाद साफ गंगाजल से धोकर एक साफ लाल या पीले कपड़े पर स्थापित करें।
  3. दीपक व धूप जलाएं: पूजा स्थल पर गाय के घी का दीपक और सुगंधित अगरबत्ती जलाकर वातावरण को शांत व पवित्र बनाएं।
  4. मंत्र जप से प्राण प्रतिष्ठा: संबंधित ग्रह के बीज मंत्र का 108 बार शांत मन से जप करें ताकि रत्न की शक्ति पूरी तरह सक्रिय हो जाए।
  5. शुभ होरा में धारण: सुबह सूर्योदय के समय शुभ होरा में ईश्वर का ध्यान करते हुए इसे अपनी निर्धारित उंगली में धारण करें।

व्यावहारिक समझ और अंतर्मन का संतुलन

जीवन में सभी गुणों का संतुलन बनाएं। न अधिक क्रोध, न अधिक मोह; शांति, दया और कर्मठता से हर चुनौती को अवसर में बदलें।

रत्न केवल एक सहारा है; आपकी असली ताकत आपकी मेहनत, ईमानदारी और अच्छे कर्म हैं। जब आप सही आचरण रखते हैं और ईश्वर पर भरोसा करते हैं, तो रत्न का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

ज्योतिषीय सरल उपाय व अनुभवी सलाह

शुक्ल पक्ष में नवग्रह स्तोत्र का 9 बार पाठ करके प्राण प्रतिष्ठा करें और पक्षियों को नवधान्य (सात या नौ अनाज) डालें।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

नवरत्न अंगूठी में माणिक्य (रूबी) को बीच में ही क्यों रखा जाता है?

क्योंकि सूर्य सभी ग्रहों के राजा और जीवन के मूल स्रोत हैं; माणिक्य को केंद्र में रखने से बाकी आठों ग्रहों की ऊर्जा संतुलित रहती है।

क्या नवरत्न अंगूठी को कोई भी व्यक्ति बिना कुंडली दिखाए पहन सकता है?

हाँ, नवरत्न में सभी नौ ग्रहों का सटीक संतुलन होता है, जिससे कोई भी ग्रह बुरा प्रभाव नहीं डालता और यह सभी के लिए शुभ व सुरक्षित मानी जाती है।

नवरत्न अंगूठी को किस धातु में और किस दिन पहनना चाहिए?

नवरत्न को सोने या अष्टधातु में बनवाकर रविवार या गुरुवार की सुबह गुरु पुष्य या रवि पुष्य योग में पहनना सबसे उत्तम माना जाता है।

Share This Insight Astrology & Gemstones

अपनी कुंडली और लग्न के अनुसार जानिए कि नवरत्न अंगूठी पेंडेंट किसे पहनना चाहिए और किन लोगों के लिए यह नुकसानदायक हो…

नवरत्न अंगूठी पेंडेंट: किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं

Share to WhatsApp Post