हमारी हथेलियों और अंगुलियों के पोरों में असंख्य तंत्रिकाएं और ऊर्जा केंद्र स्थित होते हैं। प्राचीन ऋषियों ने इन ऊर्जा परिपथों को नियंत्रित करने के लिए मुद्रा शास्त्र का विकास किया। हाथ की पांचों अंगुलियां पंचमहाभूतों का प्रतिनिधित्व करती हैं: अंगूठा (अग्नि), तर्जनी (वायु), मध्यमा (आकाश), अनामिका (पृथ्वी) और कनिष्ठिका (जल)। जब अंगुलियों के पोरों को विशिष्ट क्रम में स्पर्श किया जाता है, तो शरीर में संबंधित तत्व का असंतुलन तत्काल ठीक होने लगता है। क्रियास्य मुद्रा स्टूडियो आपको स्वास्थ्य, हृदय सुरक्षा और ध्यान के लिए प्रामाणिक हस्त मुद्राओं का सचित्र मार्गदर्शन प्रदान करता है।
प्रमुख कल्याणकारी हस्त मुद्राएं
- ज्ञान मुद्रा (अंगूठा + तर्जनी): स्मरण शक्ति, एकाग्रता और शांत मन के लिए सर्वोत्तम।
- वायु मुद्रा: जोड़ों का दर्द, गैस और सायटिका में तत्काल राहत।
- प्राण मुद्रा (अंगूठा + अनामिका + कनिष्ठिका): शरीर की दुर्बलता, आंखों की कमजोरी और थकान दूर करने वाली संजीवनी मुद्रा।
- अपान वायु (हृदय) मुद्रा: हृदय रोगों, घबराहट और सीने के भारीपन में 'मृतसंजीवनी' समान।
- सूर्य मुद्रा: मोटापा घटाने, कोलेस्ट्रॉल कम करने और पाचन अग्नि तेज करने वाली मुद्रा।
मुद्रा शास्त्र का अभ्यास अभी आरम्भ करें
क्रियास्य मुद्रा स्टूडियो द्वारा अपनी समस्या के अनुसार सही मुद्रा चुनें और टाइमर के साथ प्रतिदिन 15-30 मिनट अभ्यास करें।
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