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हस्तरेखा में ग्रहों के पर्वत: बृहस्पति, शनि, सूर्य और शुक्र के ऊर्जा केंद्र

अपनी हथेली के सातों ग्रह पर्वतों के रहस्य जानें। समझें कि गुरु, सूर्य, बुध और शुक्र के पर्वत किस प्रकार नेतृत्व, यश, कला और धन योग को नियंत्रित करते हैं।

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लेखक: 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

हस्तरेखा शास्त्र में यदि रेखाएं ऊर्जा के संचरण मार्ग हैं, तो ग्रहों के पर्वत (पर्वत क्षेत्र) ऊर्जा के मुख्य भंडार हैं। प्रत्येक उंगली के नीचे और हथेली के किनारों पर स्थित ये उभार विशिष्ट ब्रह्मांडीय और मनोवैज्ञानिक क्षमताओं को संचित रखते हैं। किसी पर्वत का पुष्ट और केंद्रित होना उस ग्रह के सकारात्मक गुणों के प्रस्फुटन को दर्शाता है।

सातों ग्रह पर्वतों का शास्त्रीय स्वरूप

पर्वत स्थान कारक तत्व शुभ लक्षण
गुरु पर्वत तर्जनी उंगली के नीचे नेतृत्व, धर्म, ज्ञान, सम्मान और महत्वाकांक्षा पुष्ट, उभरा हुआ और स्पष्ट शीर्ष बिंदु युक्त; स्वाभाविक आदर प्राप्ति
शनि पर्वत मध्यमा उंगली के नीचे अनुशासन, गूढ़ विद्याएं, एकांत, कर्मठता समतल अथवा हल्का सा उठा हुआ, अत्यधिक जालियों से रहित
सूर्य पर्वत अनामिका उंगली के नीचे यश, कला, राजयोग, सौंदर्य और कीर्ति गुलाबी आभा लिए हुए पुष्ट पर्वत, स्पष्ट सूर्य रेखा
बुध पर्वत कनिष्ठिका उंगली के नीचे व्यापारिक चातुर्य, संवाद, हास्य, बौद्धिक गति उभरा हुआ, सीधी खड़ी रेखाएं (चिकित्सक व हीलर के लक्षण)
शुक्र पर्वत अंगूठे के मूल में भौतिक सुख, ऐश्वर्य, आकर्षण, प्राणशक्ति पुष्ट, कोमल, लालिमा युक्त और जीवन रेखा से सुरक्षित
चंद्र पर्वत हथेली के निचले किनारे पर कल्पनाशीलता, अंतर्ज्ञान, यात्रा, मानसिक शांति साफ, बिना आड़ी-तिरछी रेखाओं वाला सुगठित उभार
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