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सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और शुभ मुहूर्त महा-मार्गदर्शिका

दैनिक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक खगोलीय गणनाएं और शास्त्रीय नियम।

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लेखक: Kriyasya Companion 3 मिनट का पाठ अपडेट: October 24, 2026

सनातन खगोल विज्ञान और काल गणना की आधारशिला है हिन्दू पंचांग (पञ्च + अंग—पांच अंग)। आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर केवल सूर्य पर आधारित है, जबकि वैदिक पंचांग सूर्य और चंद्रमा की परस्पर खगोलीय स्थिति के आधार पर समय के सूक्ष्म स्पंदन और ऊर्जा को मापता है। पंचांग के पांच अनिवार्य अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण। किसी भी मांगलिक कार्य—विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ, या उपवास—को प्रकृति की ऊर्जा के अनुकूल करने हेतु पंचांग का ज्ञान अनिवार्य है। वैदिक पंचांग पोर्टल पर प्रतिदिन की तिथि, नक्षत्र, राहुकाल, अभिजित मुहूर्त, और चौघड़िया की प्रामाणिक गणनाएं उपलब्ध हैं।

पंचांग के पांच पावन अंग और उनका वैज्ञानिक आधार

पंचांग का अंग खगोलीय व गणितीय आधार मानव जीवन व कर्म पर प्रभाव
1. तिथि (Lunar Day) सूर्य और चंद्रमा के बीच का 12 अंश (डिग्री) का कोणीय अंतर। एक माह में 30 तिथियां होती हैं। मन, भावनाओं, शारीरिक रसों और उपवास-व्रत की सिद्धि का निर्धारण करती है।
2. वार (Solar Weekday) सप्ताह के 7 दिन जो सौर मंडल के 7 प्रमुख ग्रहों द्वारा संचालित होते हैं। शारीरिक ऊर्जा, आयु और दिन विशेष के कार्यों की सफलता को प्रभावित करता है।
3. नक्षत्र (Constellation) चंद्रमा के भ्रमण पथ पर स्थित 27 स्थिर तारों के समूह (प्रत्येक 13°20' का भाग)। व्यक्ति के स्वभाव, मानसिक सोच, यात्रा और नवीन कार्य के शुभारंभ का आधार है।
4. योग (Luni-Solar Angle) सूर्य और चंद्रमा के स्पष्ट भोगांशों का योग (कुल 27 योग, जैसे विष्कुम्भ, प्रीति, आदि)। स्वास्थ्य, संबंधों की मधुरता और वातावरण की सकारात्मक ऊर्जा का द्योतक है।
5. करण (Half-Tithi) तिथि का आधा भाग (6 अंश का अंतर)। कुल 11 करण होते हैं (7 चर, 4 स्थिर)। व्यावहारिक कार्यों की सफलता, अनुबंध, क्रय-विक्रय और निर्माण कार्य का समय तय करता है।

दैनिक जीवन में पंचांग देखने के 3 आवश्यक नियम

  1. राहुकाल से बचाव: प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का राहुकाल होता है; इस अवधि में कोई भी नया कार्य, यात्रा या निवेश आरंभ न करें।
  2. अभिजित मुहूर्त का लाभ: दोपहर के समय पड़ने वाला अभिजित मुहूर्त सभी प्रकार के कार्यों के लिए श्रेष्ठ है, यह अनेक दोषों को स्वतः समाप्त करता है।
  3. साधना व तिथि का मेल: शिव आराधना के लिए प्रदोष/त्रयोदशी, विष्णु आराधना के लिए एकादशी और गणेश पूजन के लिए चतुर्थी तिथि का चयन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिथि का समय प्रतिदिन अलग-अलग क्यों बदलता है?

चंद्रमा की गति स्थिर नहीं होती। चंद्रमा जब पृथ्वी के निकट या दूर होता है, तो सूर्य से 12 अंश की दूरी तय करने में लगने वाला समय 19 से 26 घंटे तक घटता-बढ़ता है, जिससे तिथि कभी भी शुरू या समाप्त हो सकती है।

शुभ चौघड़िया में कौन-कौन से मुहूर्त आते हैं?

चौघड़िया में अमृत, शुभ, लाभ और चंचल (चल) को शुभ माना गया है, जबकि उद्वेग, रोग और काल को अशुभ माना जाता है।

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