वैदिक ज्योतिष में कुछ विशेष ग्रह स्थितियों को ग्रह दोष की संज्ञा दी गई है। इनमें राहु और केतु (छाया ग्रह), कालसर्प योग और पितृ दोष प्रमुख हैं। जब ये दोष कुंडली में सक्रिय होते हैं, तो व्यक्ति को अकारण मानसिक तनाव, अनिद्रा, अचानक बनते काम बिगड़ने, या पारिवारिक अशांति का सामना करना पड़ता है। लेकिन वृहत्पाराशर होरा शास्त्र और प्राचीन उपचार संहिताओं के अनुसार, इन दोषों से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। ये दोष पूर्वजन्म के संचित कर्म ऋणों का संकेत होते हैं, जिन्हें विशिष्ट अनुष्ठानों—जैसे रुद्राभिषेक, छाया दान, काले तिल का तर्पण और सात्विक आचरण—से पूर्णतः शांत किया जा सकता है। ग्रह दोष निवारण साधन (Graha Dosh Nivaran) राहु-केतु, कालसर्प और पितृ दोष के प्रामाणिक और भयमुक्त शास्त्रीय उपाय प्रस्तुत करता है।
राहु-केतु, कालसर्प व पितृ दोष के सटीक उपाय जानें
अपनी कुंडली में छाया ग्रहों की स्थिति की जांच करें। कालसर्प योग, पितृ ऋण और राहु-केतु की शांति के लिए प्रामाणिक शास्त्रीय विधि और दान नियम देखें।
4 प्रमुख ग्रह दोष और उनके अचूक शास्त्रीय उपाय
शास्त्रों में प्रत्येक दोष की शांति के लिए अलग-अलग कर्म और संकल्प निर्धारित हैं:
दोष कोई श्राप नहीं, बल्कि आत्मा द्वारा पूर्वजन्म में छोड़े गए अधूरे कर्मों का स्मरण हैं। श्रद्धापूर्वक किए गए सात्विक उपाय इन दोषों को पुण्य में बदल देते हैं।
अपने ग्रह दोषों की शांति करें
कुंडली के दोषों का विश्लेषण करें और सरल, प्रभावी शास्त्रीय उपायों से शांति पाएं।
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