भोजन संबंधी विकार (Eating Disorders) गंभीर मानसिक और शारीरिक स्थितियां हैं जिनमें भोजन, वजन और शारीरिक बनावट को लेकर अत्यधिक और हानिकारक व्यवहार देखा जाता है। विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक क्रिस्टोफर फेयरबर्न के ट्रांसडायग्नोस्टिक संज्ञानात्मक मॉडल (CBT-E) के अनुसार, चाहे वह एनोरेक्सिया हो, बुलिमिया हो या बिंज ईटिंग, इन सभी की जड़ में एक ही मुख्य समस्या होती है: वजन और शारीरिक आकार का अति-मूल्यांकन (Over-evaluation of Shape & Weight)। व्यक्ति अपने पूरे आत्म-सम्मान और जीवन के मूल्य को केवल इस बात पर तौलता है कि उसका वजन कितना है और वह अपनी भूख को कितना नियंत्रित कर सकता है। भोजन संबंधी विकार अवलोकन मनोशिक्षा मॉड्यूल 21 पाठों में इस दुष्चक्र के वैज्ञानिक कारणों और सीबीटी-ई (CBT-E) उपचार का मार्गदर्शन करता है।
⚖️ स्वास्थ्य व विधिक सुरक्षा अस्वीकरण
यह डिजिटल स्व-सहायता अभ्यास और मार्गदर्शिका केवल सामान्य मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यक्तिगत आत्म-जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, नैदानिक मनोवैज्ञानिक परीक्षण, मनोचिकित्सा या डॉक्टर-मरीज संबंध का विकल्प नहीं है। यदि किसी भी शारीरिक या श्वास अभ्यास से आपको बेचैनी अथवा मानसिक तनाव महसूस हो, तो तुरंत रुकें और योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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फेयरबर्न का ट्रांसडायग्नोस्टिक चक्र
भोजन विकारों में व्यक्ति खानपान के बेहद कठोर और अवास्तविक नियम बनाता है। जैसे ही किसी नियम का हल्का सा भी उल्लंघन होता है (जैसे एक बिस्कुट खा लेना), उसका 'सब कुछ या कुछ नहीं' वाला दिमाग सोचता है कि "सब बर्बाद हो गया," जिससे अत्यधिक खाने (binge) या उल्टी करने का चक्र शुरू हो जाता है।
उन्नत व्यवहार थेरेपी (CBT-E)
सीबीटी-ई थेरेपी में व्यक्ति को दिन में नियमित 3 बार संतुलित भोजन और 2 बार नाश्ता करने की आदत डाली जाती है, बार-बार वजन नापने की लत छुड़ाई जाती है, और आत्म-सम्मान को वजन के तराजू से मुक्त कराया जाता है।
