Skip to main content
Tools

दिव्यांगता अधिकार और समावेशन: संयुक्त राष्ट्र CRPD, सामाजिक मॉडल और सुगम्यता

दिव्यांगता के मानवाधिकार दृष्टिकोण, माइक ओलिवर का सामाजिक मॉडल और सार्वभौमिक सुगम्यता (Accessibility) पर 10 संरचित पाठ।

हिन्दी संस्करण Read in English →
लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

दिव्यांगता अधिकार, समावेशन और सुगम्यता (Disability Inclusion & Rights) संयुक्त राष्ट्र के ऐतिहासिक UN CRPD समझौते (2006) पर आधारित एक मानवाधिकार आंदोलन है। पुराने जमाने का मेडिकल मॉडल यह मानता था कि "कमी व्यक्ति के शरीर या दिमाग में है जिसे ठीक करना होगा," और चैरिटी मॉडल दिव्यांगों को केवल दया का पात्र समझता था। इसके विपरीत, माइक ओलिवर का दिव्यांगता का सामाजिक मॉडल (Social Model of Disability) सिद्ध करता है कि कोई व्यक्ति अपने शारीरिक अंग की कमी से नहीं, बल्कि समाज की रुकावटों (जैसे इमारतों में रैंप न होना, नौकरी में भेदभाव और हीन भावना) से दिव्यांग बनता है। दिव्यांगता अधिकार और समावेशन मनोशिक्षा मॉड्यूल 10 पाठों में 'हमारे बिना हमारे लिए कुछ नहीं' (Nothing About Us Without Us) के नारे, सुगम्यता और सम्मानजनक समावेशन का वैज्ञानिक विवरण देता है।

मेडिकल मॉडल बनाम सामाजिक मॉडल

यदि कोई व्हीलचेयर उपयोगकर्ता किसी इमारत में प्रवेश नहीं कर पाता, तो समस्या उसकी व्हीलचेयर में नहीं है, बल्कि समस्या इमारत में रैंप न बनाने वाले समाज में है। बाधाएं समाज ने बनाई हैं, इसलिए बाधाओं को हटाना भी समाज का कानूनी दायित्व है।

सार्वभौमिक डिजाइन (Universal Design) का लाभ

जब समाज दिव्यांगों के लिए रैंप, लिफ्ट और वीडियो में सबटाइटल जैसी सुविधाएं बनाता है, तो उसका लाभ बुजुर्गों, बच्चों और पूरे समाज को मिलता है (कर्व-कट प्रभाव)। दिव्यांगता कोई कलंक नहीं, बल्कि मानव विविधता का एक सम्मानित रूप है।

Share This Insight Tools

दिव्यांगता के मानवाधिकार दृष्टिकोण, माइक ओलिवर का सामाजिक मॉडल और सार्वभौमिक सुगम्यता (Accessibility) पर 10 संरचित पाठ।

दिव्यांगता अधिकार और समावेशन: संयुक्त राष्ट्र CRPD, सामाजिक मॉडल और सुगम्यता

Share to WhatsApp Post