Om Jai Dharm Dhurandar Dharmraj Ki Aarti Lyrics in Hindi
जय लोकत्राता ।
धर्मराज प्रभु तुम ही,
हो हरिहर धाता ॥
पापी जन कारण ।
सुकृति हेतु हो पर तुम,
वैतरणी तारण॥
नीयत स्वामी ।
पाप पुण्य के ज्ञाता,
तुम अन्तर्यामी ॥
पाप पुण्य लखते ।
चित्रगुप्त द्वारा तुम,
लेखा सब रखते ॥
शय्याबानी ।
तब कृपया, पाते हैं,
सम्पत्ति मनमानी ॥
का करवाते परिणय ।
वंशवृद्धि तुम उनकी,
करते नि:संशय ॥
तुष्ट दयासिन्धु ।
मृत्यु अनन्तर तुम ही,
हो केवल बन्धु ॥
अब तुम दया ह्रदय धारो ।
जगत सिन्धु से स्वामिन,
सेवक को तारो ॥
जो कोई नर गावे ।
धरणी पर सुख पाके,
मनवांछित फल पावे ॥
Om Jai Dharm Dhurandar Dharmraj Ki Aarti Lyrics in English
Jai Loktrata.
Dharamraj Prabhu tum hi,
Ho Harihar Dhata.
Paapi Jan Karan.
Sukriti Hetu Ho Par Tum,
Vaitarni Taran.
Niyat Swami.
Paap Punya Ke Gyata,
Tum Antaryami.
Paap Punya Lakhte.
Chitragupt Dwara Tum,
Lekha Sab Rakhte.
Shayyabani.
Tab Kripaya, Paate Hain,
Sampatti Manmaani.
Ka Karvate Parinay.
Vanshvriddhi Tum Unki,
Karte Nishchay.
Tusht Dayasindhu.
Mrityu Anantar Tum Hi,
Ho Keval Bandhu.
Ab Tum Daya Hriday Dharo.
Jagat Sindhu Se Swamin,
Sevak Ko Taro.
Jo Koi Nar Gaave.
Dharani Par Sukh Paake,
Manvanchhit Phal Paave.
Om Jai Dharm Dhurandar Dharmraj Ki Aarti Meaning in Hindi
जय लोकत्राता।
धर्मराज प्रभु तुम ही,
हो हरिहर धाता।
पापी जन कारण।
सुकृति हेतु हो पर तुम,
वैतरणी तारण।
नीयत स्वामी।
पाप पुण्य के ज्ञाता,
तुम अन्तर्यामी।
पाप पुण्य लखते।
चित्रगुप्त द्वारा तुम,
लेखा सब रखते।
शय्याबानी।
तब कृपया, पाते हैं,
सम्पत्ति मनमानी।
का करवाते परिणय।
वंशवृद्धि तुम उनकी,
करते नि:संशय।
तुष्ट दयासिन्धु।
मृत्यु अनन्तर तुम ही,
हो केवल बन्धु।
अब तुम दया ह्रदय धारो।
जगत सिन्धु से स्वामिन,
सेवक को तारो।
जो कोई नर गावे।
धरणी पर सुख पाकर,
मनवांछित फल पावे।
Om Jai Dharm Dhurandar Dharmraj Ki Aarti Meaning in English
Jai Loktrata.
Dharamraj Prabhu tum hi,
Ho Harihar Dhata.
Paapi Jan Karan.
Sukriti Hetu Ho Par Tum,
Vaitarni Taran.
Niyat Swami.
Paap Punya Ke Gyata,
Tum Antaryami.
Paap Punya Lakhte.
Chitragupt Dwara Tum,
Lekha Sab Rakhte.
Shayyabani.
Tab Kripaya, Paate Hain,
Sampatti Manmaani.
Ka Karvate Parinay.
Vanshvriddhi Tum Unki,
Karte Nishchay.
Tusht Dayasindhu.
Mrityu Anantar Tum Hi,
Ho Keval Bandhu.
Ab Tum Daya Hriday Dharo.
Jagat Sindhu Se Swamin,
Sevak Ko Taro.
Jo Koi Nar Gaave.
Dharani Par Sukh Paake,
Manvanchhit Phal Paave.
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