सनातन परंपरा में दान और व्रत को कलयुग का सबसे बड़ा तप माना गया है। शास्त्रों का स्पष्ट कथन है कि बिना मूल्य चुकाए और बिना आत्म-संयम के कोई भी आध्यात्मिक प्रगति संभव नहीं है। लेकिन दान और उपवास भी तभी फलदायी होते हैं जब वे सही विधि, सही समय और सुपात्र व्यक्ति को दिए जाएं। मत्स्य पुराण के अनुसार, यदि कुंडली के शुभ योगकारक ग्रह की वस्तुओं का दान कर दिया जाए तो उसका बल क्षीण हो जाता है, जबकि अशुभ या कष्टकारी ग्रह की वस्तुओं का दान करने से ग्रह पीड़ा तुरंत शांत होती है। दान एवं व्रत कैलेंडर साधन (Daan & Vrat Calendar) सातों वारों के अधिपति ग्रहों, उनकी दान योग्य वस्तुओं, सही पात्र और उपवास के नियमों का विस्तृत विवरण देता है।
वार अनुसार दान और उपवास का प्रामाणिक कैलेंडर देखें
जानें किस दिन क्या दान करना चाहिए और किस ग्रह के लिए क्या परहेज रखना जरूरी है। 7 दिनों का संपूर्ण दान-पुण्य एवं व्रत मार्गदर्शक।
7 दिनों का नवग्रह दान व व्रत नियम
सप्ताह के प्रत्येक दिन के लिए विशिष्ट दान और व्रत का विधान है:
गुप्त दान महादान माना गया है। जब दायां हाथ दान करे तो बाएं हाथ को भी पता न चले। अहंकार से रहित होकर दिया गया दान ही जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट करता है।
आज का शुभ दान और व्रत जानें
दिन के अनुसार सही दान सामग्री और उपवास विधि का चयन करें।
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