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नैदानिक तंत्रिका-मनोविज्ञान (Neuropsychology): ह्यूस्टन मॉडल और लूरिया मस्तिष्क इकाइयां

क्लिनिकल न्यूरोसाइकोलॉजी के वैज्ञानिक आधार, अलेक्जेंडर लूरिया की 3 मस्तिष्क इकाइयां और बोस्टन प्रोसेस दृष्टिकोण पर 14 संरचित पाठ।

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लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

नैदानिक तंत्रिका-मनोविज्ञान (Clinical Neuropsychology / क्लिनिकल न्यूरोसाइकोलॉजी) मनोविज्ञान और न्यूरोलॉजी का वह उच्चतम विशेषज्ञता क्षेत्र है जो मस्तिष्क की चोटों, बीमारियों और विकारों के व्यवहार और सोचने की क्षमता पर प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन करता है। 1998 के ऐतिहासिक ह्यूस्टन सम्मेलन (Houston Guidelines) द्वारा मानकीकृत इस विशेषज्ञता के तहत एक न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट को न्यूरोएनाटॉमी (मस्तिष्क की संरचना) और मानकीकृत परीक्षणों का गहन ज्ञान होता है। कई बार एमआरआई या सीटी स्कैन पूरी तरह सामान्य आते हैं, परंतु मरीज की याददाश्त या एकाग्रता में गंभीर रुकावट होती है; इसे न्यूरोसाइकोलॉजिकल परीक्षणों से ही पकड़ा जा सकता है। नैदानिक तंत्रिका-मनोविज्ञान मनोशिक्षा मॉड्यूल 14 पाठों में ह्यूस्टन दिशानिर्देशों, अलेक्जेंडर लूरिया के मस्तिष्क मॉडल और एडिथ कपलान के बोस्टन प्रोसेस दृष्टिकोण का वैज्ञानिक विवरण देता है।

अलेक्जेंडर लूरिया की 3 मस्तिष्क इकाइयां

1. ऊर्जा और सतर्कता इकाई (ब्रेनस्टेम): दिमाग को जगाए रखना। 2. सूचना प्रसंस्करण इकाई (पीछे का मस्तिष्क): देखना, सुनना और यादें संजोना। 3. योजना और नियंत्रण इकाई (सामने का प्रीफ्रॉन्टल कॉर्टेक्स): सोचना, निर्णय लेना और गलतियों को सुधारना।

एडिथ कपलान का बोस्टन प्रोसेस दृष्टिकोण

न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट केवल यह नहीं देखता कि मरीज ने कितने अंक हासिल किए; वह यह देखता है कि मरीज ने किस तरीके (Process) से सवाल हल किया। इससे यह पता चलता है कि मस्तिष्क का कौन सा सूक्ष्म रास्ता प्रभावित हुआ है और उसे कैसे ठीक किया जाए।

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क्लिनिकल न्यूरोसाइकोलॉजी के वैज्ञानिक आधार, अलेक्जेंडर लूरिया की 3 मस्तिष्क इकाइयां और बोस्टन प्रोसेस दृष्टिकोण पर 14 संरचित पाठ।

नैदानिक तंत्रिका-मनोविज्ञान (Neuropsychology): ह्यूस्टन मॉडल और लूरिया मस्तिष्क इकाइयां

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