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बाल व किशोर नैदानिक मनोविज्ञान: सिचेती मॉडल और विकासात्मक मूल्यांकन

बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञता के आधार, दांते सिचेती का विकासात्मक सिद्धांत और बच्चों के बहु-पक्षीय परीक्षणों पर 14 संरचित पाठ।

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लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

बाल और किशोर नैदानिक मनोविज्ञान (Clinical Child and Adolescent Psychology) मनोविज्ञान की वह विशेष शाखा है जो शिशुओं, बच्चों और टीनएजर्स के मानसिक, भावनात्मक और न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों के वैज्ञानिक निदान और उपचार पर केंद्रित है। डॉ. दांते सिचेती के विकासात्मक मनोविकृति विज्ञान (Developmental Psychopathology) के अनुसार, बच्चे कोई 'छोटे वयस्क' नहीं होते; उनका मस्तिष्क लगातार विकसित हो रहा होता है। इसलिए बच्चों के व्यवहार को समझने के लिए उनकी उम्र, परिवार के माहौल और स्कूल की परिस्थितियों को एक साथ देखना अनिवार्य होता है। बाल और किशोर नैदानिक मनोविज्ञान मनोशिक्षा मॉड्यूल 14 पाठों में इक्विफाइनैलिटी (विभिन्न कारणों से एक ही बीमारी होना), मल्टीफाइनैलिटी, खेल आधारित थेरेपी (Play Therapy) और बाल मानसिक परीक्षणों का वैज्ञानिक विवरण देता है।

दांते सिचेती का विकासात्मक सिद्धांत

एक ही आघात (जैसे माता-पिता का तलाक) अलग-अलग बच्चों पर अलग-अलग असर डाल सकता है (मल्टीफाइनैलिटी)। कोई बच्चा पढ़ाई में पिछड़ सकता है, कोई विद्रोही हो सकता है, और कोई और मजबूत बनकर उभर सकता है। बच्चे के आंतरिक लचीलेपन को पहचानना ही उपचार की चाबी है।

बहु-पक्षीय मूल्यांकन (Multi-Informant Assessment)

बच्चा खुद डॉक्टर के पास नहीं आता; माता-पिता लाते हैं। इसलिए बच्चे के इलाज में केवल बच्चे से बात करना काफी नहीं होता; माता-पिता की बातें, स्कूल के शिक्षकों की रिपोर्ट और खेल-खेल में बच्चे के हाव-भाव देखकर ही सही इलाज तय किया जाता है।

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बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञता के आधार, दांते सिचेती का विकासात्मक सिद्धांत और बच्चों के बहु-पक्षीय परीक्षणों पर 14 संरचित पाठ।

बाल व किशोर नैदानिक मनोविज्ञान: सिचेती मॉडल और विकासात्मक मूल्यांकन

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