Skip to main content
Tools

भांग और मानसिक स्वास्थ्य: उच्च-टीएचसी, मनोविकृति (Psychosis) का खतरा और सीबी1 रिसेप्टर्स

गांजा व भांग के मानसिक स्वास्थ्य पर खतरे, सिज़ोफ्रेनिया की संभावना और अमोटिवेशनल सिंड्रोम पर 20 वैज्ञानिक पाठ।

हिन्दी संस्करण Read in English →
लेखक: Kriyasya Companion 2 मिनट का पाठ अपडेट: October 23, 2026

भांग, गांजा और चरस (Cannabis) का मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और जटिल प्रभाव पड़ता है। मानव मस्तिष्क में एक स्वाभाविक एंडोकैनबिनोइड प्रणाली होती है जो भावनाओं और याददाश्त को नियंत्रित करती है। भांग में पाया जाने वाला मुख्य नशीला तत्व टीएचसी (THC) मस्तिष्क के सीबी1 (CB1) रिसेप्टर्स से जुड़ता है। आधुनिक हाइब्रिड भांग में टीएचसी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो मस्तिष्क के विकास और मानसिक संतुलन के लिए अत्यधिक खतरनाक सिद्ध हो रही है। भांग और मानसिक स्वास्थ्य मनोशिक्षा मॉड्यूल 20 पाठों में उच्च-टीएचसी के कारण होने वाले मतिभ्रम, सिज़ोफ्रेनिया के बढ़ते जोखिम, अमोशनल सिंड्रोम (उत्साह की कमी) और कैनबिनोइड हाइपरमेसिस सिंड्रोम की विस्तृत जानकारी देता है।

भांग और मनोविकृति (Psychosis) का गहरा संबंध

विश्व प्रसिद्ध अध्ययनों से सिद्ध हो चुका है कि अत्यधिक टीएचसी वाले गांजे या भांग का नियमित सेवन करने से मनोविकृति (वहम, आवाजें सुनाई देना) और सिज़ोफ्रेनिया होने का खतरा 5 गुना तक बढ़ जाता है, खासकर युवाओं में जिनका मस्तिष्क अभी विकसित हो रहा होता है।

अमोटिवेशनल सिंड्रोम और अत्यधिक उल्टी की बीमारी (CHS)

लंबे समय तक भांग का सेवन करने से मस्तिष्क में डोपामाइन बनना कम हो जाता है जिससे व्यक्ति काम या पढ़ाई के प्रति पूरी तरह उदासीन (Apathetic) हो जाता है। इसके अलावा कुछ लोगों में लगातार पेट दर्द और उल्टियों की बीमारी (CHS) हो जाती है जो केवल गर्म पानी से नहाने पर ही थोड़ी शांत होती है।

Share This Insight Tools

गांजा व भांग के मानसिक स्वास्थ्य पर खतरे, सिज़ोफ्रेनिया की संभावना और अमोटिवेशनल सिंड्रोम पर 20 वैज्ञानिक पाठ।

भांग और मानसिक स्वास्थ्य: उच्च-टीएचसी, मनोविकृति (Psychosis) का खतरा और सीबी1 रिसेप्टर्स

Share to WhatsApp Post