सनातन काल गणना के अनुसार समय कभी भी एक समान नहीं रहता; उसमें निरंतर ऊर्जा का प्रवाह बदलता रहता है। जब कोई महत्वपूर्ण कार्य प्रकृति के शुभ स्पंदन और अनुकूल ग्रहों की उपस्थिति में किया जाता है, तो उसे शुभ मुहूर्त कहते हैं। अनुबंध हस्ताक्षर, वाहन क्रय, यात्रा आरम्भ, कानूनी परामर्श अथवा नए कार्य की शुरुआत के लिए पंचांग के पांच अंगों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण), होरा और अभिजीत मुहूर्त का विचार अनिवार्य है। क्रियास्य कार्य मुहूर्त कैलकुलेटर आपके लिए सबसे शुभ समय की गणना करता है।
शुभ मुहूर्त चयन के प्रमुख नियम
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर के समय लगभग 48 मिनट का यह स्वर्णिम काल सभी सामान्य दोषों को शांत कर कार्य सिद्धि कराता है।
- राहु काल व यमगण्ड का त्याग: दिन के इन अशुभ कालखंडों में नए व महत्वपूर्ण कार्यों का आरम्भ वर्जित माना गया है।
- नक्षत्र का स्वभाव: स्थिर कार्यों (गृह प्रवेश, बैंक खाता) हेतु स्थिर नक्षत्र और यात्रा हेतु चर नक्षत्र सर्वोत्तम होते हैं।
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