Skip to main content
अध्यात्म

अभिजित मुहूर्त विजय: पंचांग शुद्धि व पांच अंगों का तालमेल

तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का सटीक मिलान करके अभिजित मुहूर्त विजय में किए गए कार्यों को सिद्ध करने के वैदिक नियम जानिए क्रियास्य पर।

हिन्दी संस्करण Read in English →
लेखक: Kriyasya Companion 4 मिनट का पाठ अपडेट: October 30, 2026

वैदिक ज्योतिष में समय केवल घड़ी की सुइयों का चलना नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा, ग्रहों की चाल और चंद्रमा की कलाओं का एक जीवंत चक्र है। हमारे ऋषियों ने शुभ मुहूर्त का विज्ञान इसलिए बनाया ताकि मनुष्य अपने हर महत्वपूर्ण कार्य को सही समय पर शुरू करके बिना बाधा के सफलता पा सके। अभिजित मुहूर्त: दोपहर का दिव्य विजय मुहूर्त, सभी दोषों का नाशक और अचूक समय के नियमों को समझकर जीवन में अपनाने से कार्यों में स्थायित्व, शांति और बरकत आती है।

अभिजित मुहूर्त विजय का मूल ज्योतिषीय रहस्य

मुख्य ज्योतिषीय नियम: अभिजित मुहूर्त: दोपहर का दिव्य विजय मुहूर्त, सभी दोषों का नाशक और अचूक समय का मूल प्रभाव दोपहर के समय भगवान विष्णु का पावन 48 मिनट का समय जो हजारों पंचांग दोषों को नष्ट कर कार्य को विजयी बनाता है से जुड़ा हुआ है। जब इसे स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के पांचों अंगों की शुद्धि के साथ देखा जाता है, तो यह कार्य में आने वाली गुप्त रुकावटों को समाप्त कर दीर्घकालिक सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

हमारे प्राचीन ग्रंथ Muhurta Chintamani & Narada Samhita के अनुसार सही मुहूर्त में शुरू किया गया कार्य व्यक्ति के भाग्य को बल देता है और ग्रहों के नकारात्मक असर को निष्प्रभावी कर देता है। नियमों का पालन करने से मन में शांति और आत्मविश्वास बना रहता है।

प्रामाणिक संस्कृत श्लोक व सरल हिंदी भावार्थ

अभिजित्सर्वदोषघ्नः श्वेताश्वः सर्वकामदः। मध्याह्ने भास्करे भाति सर्वकार्यप्रसाधकः॥

Muhurta Chintamani & Narada Samhita

सरल भावार्थ: Abhijit dissolves all doshas, rides upon white horses, and fulfills all aspirations. Shining at midday under the Sun, it accomplishes all human endeavors.

यह शास्त्रीय श्लोक इस बात का प्रमाण है कि सनातन परंपरा में समय की शुद्धि को कितना अनिवार्य माना गया है। सही समय पर ईश्वर का ध्यान करके काम शुरू करने से शुभ परिणाम अवश्य मिलते हैं।

पंचांग, मुहूर्त व ग्रह शुद्धि नियम तालिका

पहलु शास्त्र सम्मत नियम व्यावहारिक व ज्योतिषीय असर
स्वामी ग्रह व देवता भगवान सूर्य व श्री हरि विष्णु / मध्याह्न तेज और सर्वसिद्धि समय के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा को कार्य में स्थापित करता है
शुभ समय व नक्षत्र दिन का 8वां मुहूर्त (स्थानीय दोपहर 12 बजे के 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद) कार्य को बिना रुकावट के पूरा करने में सहायक बनता है
इन दोषों से बचें बुधवार के दिन अभिजित मुहूर्त का प्रयोग न करने की सलाह (राहुकाल का प्रभाव) अशुभ ग्रहों की नकारात्मक तरंगों से बचाव होता है
शुभ वार व दिशा बुधवार को छोड़कर सप्ताह के सभी दिन; पूर्व, उत्तर या ईशान दिशा दिशा और समय के तालमेल से सफलता जल्दी मिलती है
अनुकूल रंग व ऊर्जा मध्याह्न का चमकीला सुनहरा, पीला और तेजस्वी केसरिया रंग वातावरण में सात्विक और शांत भाव उत्पन्न करता है
पूजा व शुभ सामग्री तांबे के लोटे में जल, तुलसी पत्र, गाय के घी का दीपक और पीले गेंदे के फूल ईश्वर की कृपा और कार्य की पवित्रता बनाए रखता है
विशेष निषेध अभिजित मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचें गलत समय पर शुरू करने से होने वाले नुकसान से रक्षा होती है

मुहूर्त पालन के 5 सरल व अचूक चरण

  1. स्थानीय सूर्योदय का समय देखें: अपने शहर या गांव के सटीक सूर्योदय के आधार पर ही शुभ समय और चौघड़िया की गणना करें।
  2. पंचांग शुद्धि की जांच: सुनिश्चित करें कि उस समय कोई बड़ा ग्रह दोष, भद्रा, राहुकाल या ग्रहण का साया न हो।
  3. संकल्प व पवित्रता: कार्य स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें और पूर्व या उत्तर दिशा में गाय के घी का दीपक जलाएं।
  4. ईष्ट देव का स्मरण: विघ्नहर्ता श्री गणेश और संबंधित ग्रह के मंत्र का 108 बार शांत मन से जप करें।
  5. कार्य का शुभारंभ: निर्धारित शुभ मुहूर्त के अंदर ही कार्य का पहला और मुख्य कदम उठाएं।

व्यावहारिक समझ और अंतर्मन का संतुलन

सच्ची नीयत से किए गए प्रयास में ईश्वर हमेशा साथ होते हैं। जब कोई रास्ता न दिखे, तो ईश्वर पर भरोसा रखकर दोपहर में शुभ काम की शुरुआत करें।

मुहूर्त किसी अंधविश्वास का नाम नहीं है; यह प्रकृति और समय के साथ तालमेल बिठाने की वैज्ञानिक कला है। जब आपकी नीयत साफ, मेहनत पक्की और समय अनुकूल होता है, तो ईश्वर की कृपा से हर काम सिद्ध होता है।

ज्योतिषीय सरल उपाय व दोष शांति

दोपहर के समय 'ॐ नमो नारायणाय' का 108 बार जप करें और भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

अभिजित मुहूर्त का सटीक समय कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल समय को 15 भागों में बांटें; इसका ठीक 8वां भाग (लगभग 48 मिनट) अभिजित मुहूर्त कहलाता है।

इसे सबसे शक्तिशाली मुहूर्त क्यों कहा जाता है?

क्योंकि दोपहर के समय सूर्य अपने पूर्ण तेज पर होता है; यह समय लाखों छोटे-मोटे ग्रह दोषों को भस्म करके कार्य को सफल बना देता है।

बुधवार को अभिजित मुहूर्त क्यों वर्जित माना गया है?

क्योंकि बुधवार को यह समय राहुकाल के बहुत करीब आ जाता है, जिससे इसकी शुभता में कमी आ जाती है।

Share This Insight Spirituality

तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का सटीक मिलान करके अभिजित मुहूर्त विजय में किए गए कार्यों को सिद्ध करने के वैदिक…

अभिजित मुहूर्त विजय: पंचांग शुद्धि व पांच अंगों का तालमेल

Share to WhatsApp Post