जिसके अभ्यास से प्राण वायु सुषुम्ना नाड़ी में ऊपर की ओर उड़ती है, योगियों द्वारा उसे उड्डीयान बंध कहा गया है।
गहन अर्थ व ऊर्जा प्रभाव
उड्डीयान का अर्थ है ऊपर उड़ना। इस बंध में पूरी श्वास छोड़ने के बाद पेट को हल्के से भीतर और ऊपर की ओर लिया जाता है। यह केवल पेट की एक्सरसाइज नहीं है। यह सूक्ष्म योग अभ्यास है, जिसमें सही समय, खाली पेट और शिक्षक का मार्गदर्शन आवश्यक है।
साधना अनुभव:
यह अभ्यास पेट में हल्के खालीपन और ऊपर उठाव जैसा महसूस होना चाहिए। यह कभी भी दर्द, सांस की कमी, चक्कर या जबरदस्ती जैसा नहीं लगना चाहिए।
आधुनिक शरीर क्रिया व तंत्रिका विज्ञान
उदर में नकारात्मक दबाव (वैक्यूम प्रभाव) उत्पन्न कर आंतों, अग्न्याशय और यकृत की मालिश करता है और वेगस तंत्रिका को गहरा विश्राम देता है।
चरण-दर-चरण अभ्यास विधि
1
इसे केवल तब करें जब आपने इसे शिक्षक से सीखा हो।
2
पेट खाली रखें।
3
स्थिर होकर खड़े हों या बैठें।
4
सामान्य श्वास लें।
5
बिना जोर लगाए पूरी श्वास छोड़ें।
6
श्वास छोड़ने के बाद केवल तब रुकें जब सहज लगे।
7
पेट को हल्के से भीतर और ऊपर खींचें।
8
चेहरा, गला और छाती ढीली रखें।
9
पहले पेट को छोड़ें।
10
फिर धीरे और स्वाभाविक रूप से श्वास लें।
11
दोहराने से पहले विश्राम करें।
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अभ्यास केवल खाली पेट करें। उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, अल्सर, गर्भावस्था, मासिक धर्म, हाल की पेट की सर्जरी, चक्कर, कमजोरी या पेट की असुविधा में न करें।
कल्याण अस्वीकरण / Wellness Disclaimer:
यहाँ प्रस्तुत योग अभ्यास, मुद्राएँ और श्वास तकनीकें शास्त्रीय परंपरा पर आधारित हैं और केवल शैक्षिक, कल्याण और समग्र जीवनशैली के उद्देश्यों के लिए हैं। ये किसी चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं। कोई भी नया शारीरिक अभ्यास शुरू करने से पहले, विशेष रूप से यदि आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप गर्भवती हैं, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। अपने शरीर की सहज सीमा में ही अभ्यास करें।