आरती भजन मेडले — सांयकालीन भजन
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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजन्ती माला, बजावे मुरली मधुर बाला॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सब मिल आरती गाओ, संध्या का दीप जलाओ।
प्रभु के चरणों में शीश नवाओ, मंगल गीत सुनाओ॥
Om Jai Jagdish Hare, Swami Jai Jagdish Hare,
Bhakt janon ke sankat, kshan mein door kare.
Om Jai Lakshmi Mata, Maiya Jai Lakshmi Mata,
Tumko nishdin sevat, Hari Vishnu Vidhata.
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Giridhar Krishna Murari Ki,
Gale mein baijanti mala, bajaave murli madhur bala.
Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva,
Mata jaki Parvati Pita Mahadeva.
Sab mil aarti gaao, sandhya ka deep jalaao,
Prabhu ke charannon mein sheesh navaao, mangal geet sunaao.
अर्थ: यह संध्या आरती का सामूहिक भजन है जिसमें भगवान विष्णु, लक्ष्मी माता, श्रीकृष्ण और गणेश जी की स्तुति मिलकर की जाती है। भाव यह है कि सब भक्त दीप जलाकर, सिर झुकाकर और मंगल गीत गाकर ईश्वर की शरण लेते हैं।
This is a collective evening devotional medley praising Lord Vishnu, Goddess Lakshmi, Lord Krishna, and Lord Ganesha. It expresses the act of lighting the evening lamp, bowing before God, and singing auspicious songs together.
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