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आरती
आरती

विराट भगवान् का रूप आरती में

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अक्षर

ॐ जय जय जय विराट प्रभु की |

तुम ही हो जग के स्वामी, तुम ही हो जग के पिता ||

सूर्य चंद्र तारे सब तेरी ज्योति से जगमगाते |

पवन पानी अग्नि सब तेरी शक्ति से चलते ||

ब्रह्मा विष्णु शिव तुम ही हो, तुम ही हो आदि अंत |

सृष्टि स्थिति प्रलय के तुम ही हो कारण ||

वेद पुराण शास्त्र सब तेरी महिमा गाते |

संत भक्त जन सब तेरी शरण में आते ||

अगणित रूप तुम्हारे, अगणित नाम तुम्हारे |

कण कण में तुम ही व्याप्त, तुम ही हो सबके प्यारे ||

जो कोई तेरी आरती गावे, श्रद्धा भक्ति से ध्यावे |

जन्म जन्म के पाप मिटावे, परम पद पावे ||

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