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आरती
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श्री महालक्ष्मी आरती

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अक्षर

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वसलीस व्यापकरूपें व्यापक वैकुंठी।

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी॥

पद्मपराग मुकुट शोभतसे ज्योती।

सवांगी चर्चित अंगें शोभतसे दिप्ती।

सवांगी चर्चित अंगें शोभतसे दिप्ती।

रत्नखचित हार गले शोभतसे दिप्ती॥ जय देवी॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव तिन्ही तुज ध्याती।

शारदा आणि इन्द्राणी चरण तुझे वन्दिती।

शारदा आणि इन्द्राणी चरण तुझे वन्दिती।

कमलासनी मातें माते तुजला ध्याती॥ जय देवी॥

ऐश्वर्यागुण मंडित दोष न कोणा।

नित नेमें प्रेमें पूजित मन्त्र न कोणा।

नित नेमें प्रेमें पूजित मन्त्र न कोणा।

कमलापती रमापति सेवित चरणा॥ जय देवी॥

भुक्ति मुक्ति साम्राज्य दायिनी मुदा।

संसार सागर तारणे तू एक सुदा।

संसार सागर तारणे तू एक सुदा।

परात्पर तू गुणगम्य गुणागुणगम्या॥ जय देवी॥

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