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आरती
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भगवान परशुराम आरती

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अक्षर

ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।

संकटमोचन प्रभु, कष्टनिवारणकारी ॥

ॐ जय परशुधारी...

जमदग्नि के पुत्र, रेणुका के प्यारे।

शिव के वरदानी, परशु हाथ धारे ॥

ॐ जय परशुधारी...

क्षत्रिय कुल संहारक, धर्म के रखवारे।

इक्कीस बार भूमी, क्षत्रिय विहीन करे ॥

ॐ जय परशुधारी...

राम नाम के ध्यानी, विष्णु के अवतारी।

कलयुग में भी प्रभु, चिरंजीवी धारी ॥

ॐ जय परशुधारी...

सहस्रबाहु को मारा, महिष्मति के स्वामी।

अहंकार के नाशक, भक्तन के अनुगामी ॥

ॐ जय परशुधारी...

ज्ञान और तप के पुंज, क्रोध के संहारी।

शांत स्वरूप धारी, दुष्टों के संहारी ॥

ॐ जय परशुधारी...

जो कोई नर नारी, आरती ये गावे।

परशुराम प्रभु की, कृपा वो पावे ॥

ॐ जय परशुधारी...

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