Skip to main content मुख्य सामग्री पर जाएँ
English में भी उपलब्ध — ऊपर नेविगेशन से बदलें
आरती
आरती

गिरिराज आरती

पाठ पढ़ें, सुनें या अर्थ के साथ अपनी गति से आगे बढ़ें।

Giriraj मुफ़्त
सुनें या देखें

पाठ के साथ जुड़ें

वीडियो देखेंजब आप तैयार हों तब खोलें खोलेंबंद करें
आपका पाठ

अपनी गति से पढ़ें

मूल पाठ, रोमन लिपि या अर्थ चुनें। अक्षरों का आकार और पृष्ठभूमि भी बदल सकते हैं।

अक्षर

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज |

संकट में तुम राखो, भक्तन के लाज ||

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज |

संकट में तुम राखो, भक्तन के लाज ||

इंद्र कोप करि आयो, ब्रज पर डार्यो पानी |

तुमने सात दिवस तक, अंगुली पर धार्यो ||

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज |

संकट में तुम राखो, भक्तन के लाज ||

श्याम सुंदर मुख सोहे, मुकुट धरे माथे |

ग्वाल बाल संग खेलें, गायन के साथे ||

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज |

संकट में तुम राखो, भक्तन के लाज ||

भक्तन के तुम रक्षक, दुखियन के दाता |

शरण पड़े जो तेरी, भवसागर त्राता ||

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज |

संकट में तुम राखो, भक्तन के लाज ||

जो कोई तुमको ध्यावे, मनवांछित फल पावे |

रोग दोष मिट जावे, सुख संपत्ति आवे ||

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज |

संकट में तुम राखो, भक्तन के लाज ||

आरती गिरिराज की, जो कोई नर गावे |

कहत 'श्याम' शरण में, बैकुंठ धाम पावे ||

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज |

संकट में तुम राखो, भक्तन के लाज ||

पाठ पूर्ण

एक शांत क्षण लें

पाठ के भाव को मन में रहने दें, फिर चाहें तो दोबारा पढ़ें या संबंधित प्रार्थना चुनें।

संग्रह पर जाएँ
Kriyasya
✦ Talk to AI Companion →