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आरती
आरती

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर धर्मराज की आरती

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अक्षर

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर, जय लोकत्राता।

धर्मराज प्रभु तुम ही, हो हरिहर धाता॥

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर, जय लोकत्राता।

धर्मराज प्रभु तुम ही, हो हरिहर धाता॥

जय देव दण्ड पाणिधर यम तुम, पापी जन कारण।

सुकृति हेतु हो पर तुम, वैतरणी ताराण॥

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर, जय लोकत्राता।

धर्मराज प्रभु तुम ही, हो हरिहर धाता॥

न्याय विभाग अध्यक्ष हो, नीयत स्वामी।

पाप पुण्य के ज्ञाता, तुम अन्तर्यामी॥

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर, जय लोकत्राता।

धर्मराज प्रभु तुम ही, हो हरिहर धाता॥

दिव्य दृष्टि से सबके, पाप पुण्य लखते।

चित्रगुप्त द्वारा तुम, लेखा सब रखते॥

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर, जय लोकत्राता।

धर्मराज प्रभु तुम ही, हो हरिहर धाता॥

धर्मराज जी की आरती, जो कोई नर गावे।

धरणी पर सुख पाके, मनवांछित फल पावे॥

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर, जय लोकत्राता।

धर्मराज प्रभु तुम ही, हो हरिहर धाता॥

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