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आरती
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श्री सीताराम आरती

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Sita-Ram मुफ़्त
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अक्षर

गाओ गाओ री प्रिय प्रीतम की आरती।

युगल छवि निरखत मन हरषति ॥

कंचन थार कपूर की बाती।

पंच दीप झिलमिल झिलमिल ज्योति ॥

रत्न जटित सिंहासन सोहत।

सियाराम छवि मन मोहत ॥

श्री रामचन्द्रजी धनुष धारी।

श्री जानकीजी शोभा न्यारी ॥

मस्तक मुकुट कुण्डल छवि भारी।

अंग अंग भूषण मनोहारी ॥

चंदन केसर तिलक सुहावन।

अंग अंग सुगंधित पावन ॥

तुलसी दल और पुष्प की माला।

गल सोहत मोतियन की माला ॥

आरती करत सब संत सुजान।

वेद पुराण करत गुणगान ॥

आरती करत सब देव मुनिजन।

जय जय सीताराम रटत मन ॥

जो कोई गावे आरती सीताराम की।

मनवांछित फल पावे निश्चय ही ॥

प्रेम सहित जो आरती गावे।

बैकुंठ धाम को निश्चय जावे ॥

पाठ पूर्ण

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