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आरती
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गगन में थाल आरती — सार्वभौमिक आरती

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अक्षर

गगन में थाल, रवि चंद दीपक बने।

तारिका मण्डल जनक मोती जैसे जड़े॥

पवन चंवर करे, वनराय फूल चढ़ाए।

ऐसी आरती प्रभु की, सृष्टि गाती जाए॥

पाठ पूर्ण

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